सुर्खियों मे एक बार फिर सीधी पुलिस, वायरल हुआ युवक को सरेआम पीटने का वीडियो

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सुर्खियों मे एक बार फिर सीधी पुलिस, वायरल हुआ युवक को सरेआम पीटने का वीडियो

बीते दिनों थाने के अंदर कि तस्वीर वायरल होने का आया था मामला, भोपाल टीम कर रही हैं जांच

लिंक क्लिक कर देखिए वायरल वीडियो 👇

 

समय INDIA 24 @सीधी। जिले कि पुलिस का लगातार आम जनता के साथ अमानवीय चेहरा सामने आ रहा है। बीते दिनों सिटी कोतवाली के सामने प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शन कारियो के कपड़े उतरवा कर थाना प्रभारी मनोज सोनी द्वारा अपने चेंबर में हाजिरी लगवाते हुए का फोटो वायरल होने का मामला शांत नहीं हुआ था कि अब तत्कालीन अमिलिया थाना प्रभारी अभिषेक सिंह द्वारा युवक को सरेआम बाजार में पीटते हुए का वीडियो वायरल हो गया है। तत्कालीन थाना प्रभारी अभिषेक सिंह का विवादो से पहले भी गहरा नाता रहा है। इनके द्वारा आम जनता, पत्रकार व अन्य के साथ दुर्व्यवहार का मामला हो या फिर सरेआम पिटाई का मामला हो, ऐसे कई मामलों को लेकर इन्हे सीधी जिले में सेवारत होने के दौरान कई बार समय समय पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षको द्वारा लाइन अटैच किया जाता रहा है। हाल ही में सिटी कोतवाली द्वारा गिरफ्तार प्रदर्शनकारियो का बिना कपड़े कि फोटो थाने के अंदर से वायरल होने मामले में वर्तमान पुलिस अधीक्षक मुकेश श्रीवास्तव द्वारा अमिलिया थाना प्रभारी अभिषेक सिंह को निलंबित किया गया है और महानिदेशक कार्यालय के आदेश बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित सिंह (रेडियो) द्वारा सीधी पहुंचकर जांच कि जा रही है। जिसकी जांच रिपोर्ट संभतः सोमवार व मंगलवार को डीजीपी कार्यलय को सौंपी जाएगी। ऐसे में किसी पुराने मामले को लेकर हाल ही में निलंबित हुए तत्कालीन अमिलिया प्रभारी अभिषेक सिंह द्वारा युवक कि बेरहमी से पिटाई करते हुए का वीडियो वायरल हो गया है। भले ही थानो व अन्य जगहों में मानवाधिकार का बड़ा बोर्ड इसलिए लगाया जाता हो कि पुलिस जनता के साथ अमानवीय व्यवहार न करे। शिकायतकर्ताओं की समस्या सुनकर उसका निस्तारण कानून के दायरे में रहकर करें। लेकिन सीधी जिले में कुछ ऐसे पुलिस अधिकारी है जो अपनी वर्दी की धौंस दिखाने से पीछे नहीं रहते।

वायरल वीडियो कब का है इसकी पुष्टि फिलहाल नहीं किया जा सकता लेकिन सवाल जरूर उठता है कि लगातार आम जनता कि समस्याओं का निस्तारण कानून दायरों में न रह कर काम न करने वाले पुलिस अधिकारी बतौर सेवा देने का अधिकार होना चाहिए या नहीं? या फिर कानून का माखौल उड़ाने वाले ऐसे पुलिस अधिकारियो को सेवा से पृथक कर देना चाहिए? इस प्रकार के बेलगाम पुलिस अधिकारियो द्वारा जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते ही है साथ में शासन कि छवि को जनता के बीच धूमिल भी करते है।