साक्षात्कार – नायब तहसीलदार संजय मसराम ।। जीवन और संघर्ष की अनसुनी कहानी…. ।।

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साक्षात्कार – जीवन और संघर्ष की अनसुनी कहानी…. 

अमित कुमार स्वतंत्र के साथ नायब तहसीलदार संजय मसराम का साक्षात्कार   

समय INDIA 24 ▶️ “साक्षात्कार” के इस अंक में एक ऐसे अधिकारी का परिचय जिनका जन्म 14 जून 1994 को किसान गरीब परिवार में हुआ। कड़ी मेहनत और कई चुनौतियों से डट कर मुकाबला करते हुए कम उम्र में अधिकारी बन कर सफर शुरू करने वाले संजय मसराम का। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद सिविल सर्विसेस की तैयारी करते हुए पहली ही कोशिश में वर्ष 2017 में चयनित होकर आप जिला सीधी के रामपुर नैकिन में नायब तहसीलदार और मड़वास उप तहसील में सेवा दे चुके है। वर्तमान समय मे सीधी जिले के कुसमी तहसील में प्रभारी तहसीलदार की जिम्मेवारी संभाल रहे हैं ।

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🔷 प्रारंभिक शिक्षा से उच्च शिक्षा अध्ययन तक का सफर कैसा रहा?

मैं मुख्यतः मेरा गांव नक्सल प्रभावित इलाकों के बीच है वहा आज भी इतना विकास नहीं है फिर उस समय प्रारंभिक शिक्षा बड़ी चुनौतियों के बीच ही रहा। पिता किसान है आवागमन की कोई सुविधा नहीं थी लेकिन माता – पिता की इच्छा थी की मेरे सभी बच्चे पढ़े और नौकरी करे। यही माता पिता की इच्छा चुनौतियों को दूर करती गई और घर के काम काज के साथ पढ़ाई भी होती रही। पिता किसान है। मा – पिता दोनो साथ में काम करते थे हमारे पालन पोषण के लिए। मैंने अपने माता – पिता को परिवार के लिए अपने बच्चो के लिए संघर्ष करते हुए देखा है।

🔷 उच्च शिक्षा के बाद एक सामान्य घर का लड़का जिसके पास कोई खास आर्थिक मजबूती नहीं थी वो कैसे अपने स्नातक के पढ़ाई समय मित्रो के बीच स्थापित कर पाता है?

कक्षा 6 में ही बुआ मुझे अपने पास बुला ली थी उनके पास आगे की पढ़ाई हुई। उस वक्त जब चारो तरफ देखता की अन्य साथी मुझसे ज्यादा पढ़ाई में ठीक है ऐसा क्यों नहीं हो सकता की मैं भी इनसे आगे निकलू। प्रतिस्पर्धा के साथ पढ़ने की रुचि भी बढ़ती चली गई। जब जबलपुर में इंजीनियरिंग के लिए तैयारी कर रहा था लेकिन मैं यह नहीं जानता था कि इसका परिणाम क्या होगा‌। बुआ लगातार मनोबल बढ़ा रही थी, भाई बहन का अच्छा सकारात्मक सहयोग रहा। स्कॉलरशिप के सहयोग से खर्चे निकल जाते थे कोई अतिरिक्त खर्च नही थे जो भी थे वो शिक्षा से जुड़े थे। मुख्यतः छात्रावास में जो भी बच्चे थे सभी पढ़ने वाले थे । संघर्ष करके वहा तक पहुंचे थे। उनके पीछे परिवार का संघर्ष था जिससे खुद को लेवल मेंटेन करने में ऊर्जा खर्च नहीं करनी पड़ी।

🔷 इंजीनियरिंग के क्षेत्र में खुद को स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चलने वाला छात्र अचानक सिविल सर्विसेस की तरफ क्यों बढ़ा?

कॉलेज के छात्रावास का वातावरण पढ़ाई के लिए बहुत अच्छा था। वहा कई सीनियर सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे थे और जब मिलते जुलते या कही एकत्रित होते तो प्रतिदिन की होने वाली घटनाओं को लेकर सवाल किया करते थे। जवाब नहीं मालुम होने की स्थिति में फटकार मिलती थी सीनियर सजा भी देते थे। अच्छा नहीं लगता था लेकिन कुछ दिनों के बाद ऐसा लगने लगा कि मुझे इसके बारे में जानकारी रखनी चाहिए और सवालों का जवाब देना चाहिए। अपने यहां सिल्वर जुवली मनाया जाता था अच्छी नौकरी करने वाले पुराने छात्र आया करते थे जिन्होंने वहा अध्ययन किया था। जिनके द्वारा लगातार मनोबल को बढ़ाया जाता था यह सब देखते देखते सिविल सर्विसेज के प्रति रुझान बढ़ने लगा एहसास होने लगा की मेरी पढ़ाई इसी के लिए है और 2016 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर लिया। बहन के कहने पर पीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चला गया। वहा अपनी ऊर्जा का उपयोग सिविल सर्विसेस तैयारी के लिए लगाना शुरू कर दिया।

🔷 जब आप नायब तहसीलदार के पद पर चयनित हुए उस वक्त पिता के साथ – साथ परिवार में कैसा वातावरण रहा?

मेरा परीक्षा परिणाम आया मुझे फोन पर इसकी जानकारी हुई की मैं चयनित हो गया हूं। लेकिन यह पता नहीं था कि किस पद में हुआ है। जब बाद में पता चला कि नायब तहसीलदार पद में चयन हुआ है थोड़ा निराशा हुई जो अपेक्षा थी की डिप्टी कलेक्टर तक हो सकेगा जो नही हो पाया। इसी बीच निराशा में आशा भी थी कि कई साथी कई बार मेहनत करते हैं और करते रहते हैं लेकिन नही हो पाता । कम संसाधनों में और पहली बार में ही चयन होना परिवार के सभी सदस्यों के चेहरे में मुस्कान थी कोई पहली बार पूरे परिवार में अधिकारी बनने जा रहा था। निश्चित तौर वह उत्साहित वातावरण था।

🔷 अब तक के जीवन का कोई खास दिलचस्प बातें जो आज भी याद आती है और आगे बढ़ने के लिए उत्साहित करती है?

जैसा की हर कोई परिवार का चाहने लगा था कि मैं कुछ करू और बेहतर करू। इस बार बहन ने दिल्ली भेज दिया यह कह कर की तैयारी करो जो भी खर्चे लगेगे मैं दूंगा। मुझे दिल्ली के बारे में वास्तव में कोई जानकारी नहीं थी सिर्फ मैं दिल्ली नाम जानता था। जब वहां व्यवस्थित होने के बाद वहां के सीनियर जो पहले से तैयारी कर रहे थे उनसे मिलने पहुंचा लगभग तीन घंटे तक कोई किसी प्रकार मुझसे बात करना तो दूर देखा तक नहीं। सब अपनी पढ़ाई कर रहे थे और मैं देख रहा था। तीन घंटे के बाद परिचय हुआ। यह 3 घंटे मेरे लिए समय बिताना सबसे बड़ा ज्यादा कठिन था। परिचय के बाद उन्होंने कहा तैयारी में कभी परिणाम सार्थक होते हैं कई बार तो ऐसा होता है परिणाम सार्थक न होने से मन भटकने लगता है। तैयारी के लिए धैर्य की बहुत आवश्यकता होती है लेकिन चुनौती से भागना सबसे बड़ी हार है इसके बाद भी क्या तुम तैयार हो ! मैने कहा हां फिर उन्होंने तैयारी के तरीके बताए कोचिंग और विषयों पर चर्चा हुई। वास्तव में यह घटना मेरे जीवन के सबसे बड़ी दिलचस्प रही और अच्छी भी जिसे आज भी याद करता हूं।

🔷आज नायब तहसीलदार संजय अपने मन की आंखों से खुद को आने वाले समय में किस प्रकार के प्रशासनिक अधिकारी तौर पर देख रहे हैं?

इच्छाएं बहुत होती हैं, व्यक्ति जो सोचता है वह कभी ऐसा भी होता है कि नहीं कर पाता। इसलिए सपने बड़े देखने चाहिए सपने पूरे हो या ना हो लेकिन उसके नजदीक जरूर आ जाता है । अपनी उर्जा का सही उपयोग कर रहा हूं और भविष्य में निश्चित तौर पर कुछ न कुछ सार्थक और अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

🔷 आज भी कभी वापस गांव जाने के बाद किसानी में हांथ बटाने की इच्छा होती है?

वर्ष 2011 में माता का निधन हो जाने के बाद खेती पहले जैसी नहीं होती। अधाई पटाई (अधिया) स्तर पर खेती पिता जी करते हैं लेकिन अब पहले जैसा नहीं है। भाई भी तैयारी कर रहे हैं सिविल सर्विसेस के लिए हैं। हा वापस जब गांव जाना होता है तो कुछ न कुछ खेती में पिता का सहयोग करने का मन जरूर होता है।

🔷 इस कार्यकाल के दौरान COVID कि दो – दो लहरों से सामना हुआ, प्रशासकीय व्यवस्था भी आवश्यक थी। इस चुनौती को कैसे संभालना संभव हुआ?

मैं भी कोविड-19 के प्रभाव में आ गया था और अस्वस्थता के बाद भी ठीक हुआ। लगातार दोनो वर्ष में जिला प्रशासन के नेतृत्व व वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में काम किया। COVID के दौरान किसी को समस्या ना हो चाहे खाने को लेकर हो व्यवस्था को लेकर हो या फिर उपचार को लेकर हो सबका ध्यान रखना पड़ता था। यह काफी अच्छे से हो पाया अपने वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में जो एक नया अनुभव था।

🔷 युवा वर्ग जो आज तैयारी कर रहा है या फिर करना चाहता है उसके लिए आपका क्या संदेश है?

सामान्यतः इस तैयारी के लिए कड़ी मेहनत करनी होती है। दिन चर्या का ख्याल रखना होता है। अपनी ऊर्जा का सही इस्तेमाल करना और धैर्य को बनाए रखना अति आवश्यक है । मेहनत के अनुसार परिणाम आते हैं और अच्छे परिणाम आते हैं।

नोट :- यह साक्षात्कार हिन्दी समाचार पत्र “बिहान संवाद” में प्रकाशित है। इसके सभी कॉपी राइट अधिकार ALGOGEMINA MEDIA PVT LTD   (समय INDIA 24 एवं बिहान संवाद समाचार पत्र) के पास है।