लाखों की लागत से बने मीट मार्केट बाद भी खुले में चल रहा मीट व्यवसाय

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लाखों की लागत से बने मीट मार्केट बाद भी खुले में चल रहा मीट व्यवसाय

समय INDIA 24 @सीधी। ऋषि मुनियों की तपोस्थली से ख्याति प्राप्त सिद्ध भूमि वर्तमान में अपनी मूल भूत समस्यों का रोना रो रही है, जिसकी सुनवाई पिछले कई दशकों से नही हो रही है। यहॉ के जनप्रतिनिधि भले ही मंचो से विकास के बड़े बड़े दावे करते हों किन्तु वास्तविकता तो जगजाहिर है। सीधी जिले की वेपटरी स्वास्थ्य व्यवस्था, दिनो दिन गिरता शिक्षा का स्तर, ओडीएफ घोषित हो चुके सीधी जिले में आज भी ज्यादातर लोग लोटा लेकर सुबह सुबह दिख जाते हैं। अब देखिए ना पिछले लगभग एक दशक से स्थानीयजनो के द्वारा जिला मुख्यालय में मंदिरो के इर्द गिर्द संचालित अवैध मीट मार्केट हटाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, उसके बाबजूद अवैध बूचड़ खाने डंके की चोट पर शासकीय नियमों को धता बताते हुए धडल्ले से संचालित हैं। तत्कालीन उपखण्ड दण्डाधिकारी के द्वार आदेश जारी कर पुराना हनुमान मंदिर से लालता चौक पहुॅच मार्ग सहित अन्य प्रमुख स्थलो पर जानवरो को काटना व विक्रय कार्य प्रतिबंधित किया गया था साथ ही सूचना बोर्ड लगवाया गया और उसपर लिखा गया कि नियमों की अवहेलना करने पर दण्डात्मक कार्यवाई की जायेगी। उसके बाबजूद उक्त स्थल पर मॉस का अवैध व्यापार जोर शोर से चल रहा है।

धरना प्रदर्शन एवं आक्रोश रैली हुई बेअसर – सीधी नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत स्थानीय जनो एवं धार्मिक संगठनो के द्वारा विगत एक दशक से बीच बाजार संचालित अवैध मीट मार्केट को हटाने की लड़ाई लडी जा रही है। जिसमें कई बार आक्रोश रैली, धरना प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपना एवं मौखिक अनुनय विनय शामिल है। उसके बाबजूद नियम विरूद्ध संचालित अवैध मीट मार्केट को लाखों के लागत से बने नवीन सर्वसुविधा युक्त स्लाटर हाऊस में स्थानांतरित कराने में जिला प्रशासन पूरी तरह से असफल रहा है। जबकि पूर्व में नगर पालिका परिषद एवं जिला कलेक्टर की विशेष पहल पर एक दो नही दर्जनों बार मीट विक्रेता और जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों की आवश्यक बैठक आहुत हुई और उनके मांग व आश्वसन के बाद ही सर्व सुविधा युक्त स्लाटर हाऊस का निर्माण हुआ था किन्तु आज भी स्थिती यथावत है।

सर्व सुविधायुक्त मीट मार्केट बना खंडहर – मीट मार्केट संचालको की मांग पर जिला प्रशासन द्वारा दो बार अलग अलग स्थलो पर सुविधा युक्त स्लाटर हाऊस मुहैया कराया गया किन्तु कतिपय कारणों से उक्त स्थलो पर स्लाटर हाऊस का संचालन नही हो सका है। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह मुन्नू की विशेष पहल पर जन भावनाओं पर खरा उतरते हुए सर्व सुविधा युक्त स्लाटर हाऊस सौगात के रूप दिया गया था किन्तु उसके बाबजूद उक्त व्यापारियों द्वारा यहॉ स्थानांरित होना उचित नही समझा। जिसके चलते वर्तमान में उक्त स्लाटर हाऊस पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है।

क्या कहता है नियम – जानकारो की माने तो बूचडख़ाना या स्लाटर हाउस के संचालन के लिए नगर नगर पालिका से एनओसी व खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस लेना होता है। जिला मुख्यालय में मंदिरो के इर्द गिर्द व गॉव तहसील में भी अवैध तरीके से बूचडख़ाने का संचालन किया जा रहा है। जहां नियमित रूप से जानवर काटे व बेचे जा रहे हैं। जबकि नियम कहता है कि काटे जाने वाले पशुओं का पशु विभाग द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य है।

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