रासायनिक उर्वरकों पर किसानो की पूर्ण निर्भरता चिंता का विषय, स्वास्थ्य में प्रतिकूल प्रभाव

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जिले में बढ़ रही रासायनिक उर्वरकों की मांग, जैविक खेती से किसानों का छूट रहा मोह

रासायनिक उर्वरकों पर किसानो की पूर्ण निर्भरता चिंता का विषय, स्वास्थ्य में प्रतिकूल प्रभाव

अमित कुमार गौतम “स्वतंत्र” (8839245425) @ समय INDIA 24 सीधी। जिले के किसानो का जैविक खेती से मोह दूर हो रहा है और ज्यादा पैदावार पाने के लिए रासायनिक खादों का उपयोग किया जा रहा हैं। ज्यादा फसल उत्पादन को लेकर किसानो के बीच लगी होड़ में खेतों की मिट्टी में प्राकृतिक तौर से उपलब्ध उर्वरक तत्वों की कमी होती जा रही है। रबी फसल के बोनी के बाद रासायनिक खाद के लिए सूर्य उदय के दौरान से ही गोदामों के पास किसान एकत्रित हो जाते है और प्रतिदिन इनकी संख्या सैकड़ों में होती है। बढ़ती रासायनिक खादों की मांग से गोदामों में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराने में प्रशासन को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है लेकिन रासायनिक खादों से खेतो के मिट्टी की नष्ट हो रही उर्वरक क्षमता को बचाने के लिए या किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करने कोई पहल नही किया जा रहा है। जानकारों का माने तो रासायनिक खादों के उपयोग से फसल का उत्पादन औसत भले ही बढ़ा हो लेकिन आगे चल कर इन्ही खेतो की उत्पादन क्षमता कई गुना कम हो सकती है। खेतो की उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ाने और बचाने के लिए जैविक खेती पद्धति उत्पादन कर्ता और उसका उपभोग करने वाले के लाभदायक साबित होगी ।

कृषि वैज्ञानिकों कि माने तो मिट्टी परीक्षण के दौरान कई किसानों के खेतों की मिट्टी में खराबी दिखी है और उन्हें ज्यादा उर्वरक का उपयोग न करने की सलाह दी जा रही है। इसके बावजूद भी खेतों में रासायनिक खाद का कहर कम नहीं हो रहा है। रबी फसल में उपयोग की जा रही रासायनिक खाद से उर्वरक खेतों के साथ मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। जमीन में पोटेशियम, नाइट्रोजन तथा मैग्नीशियम खुद ही होता है और इनकी मात्रा खेतो में बढ़ने से इसका असर मानव जीवन के सामने बीमारियों के रूप में आ रहा है।

रासायनिक खादों के उपयोग से खेतो को नुकसान

कृषि क्षेत्रों में फसल की ज्यादा पैदावार को लेकर किसानो के बीच प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। किसान जैविक खाद का प्रयोग न कर रासायनिक खादों का उपयोग कर खेतो में पलेवा देते हैं और बीज के साथ मिला कर बोनी करते हैं। सिंचाई साधनों से खेत में पानी डालने के बाद वही रासायनिक उर्वरक घुल कर खेतो की मिट्टी में मिल जाते है और गहराई तक प्रवेश कर जाते है जिससे खेतों में पहले से उपलब्ध उर्वरकों में और तेजी हो जाती है। इससे जमीन और फसल पर तो इसका असर पड़ता ही है, साथ ही मानव जीवन के लिए भी यह खतरा है।

केमिकल युक्त उर्वरको से जल जमीन वायु प्रदूषित

जैविक खेती की ओर बढ़ रहे किसानो ने बताया की रासायनिक उर्वरक व केमिकल युक्त उर्वरको के उपयोग से प्रदूषण निरंतर बढ़ रहा है और इससे जल, जमीन और वायु प्रदूषित हो रही है। बढ़ रहे केमिकल उर्वरको कि उपयोगिता न केवल खेतो कि मिट्टी को प्रभावित कर रहे हैं बल्कि मानव जीवन के स्वास्थय पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ रहा है। केमिकल युक्त उर्वरक डालने से जमीन जहरीली हो रही है और जल के माध्यम से यह केमिकल जमीनी सतह पर पहुंच रहा है। जिससे जमीन का पानी भी जहरीला होता जा रहा हैं।

खेती के लिए जैविक और रासायनिक उर्वरक कि आवश्यकता

कृषि वैज्ञानिक धनंजय सिंह ने बताया की खेती के लिए जैविक और रासायनिक दोनों खादों की आवश्यकता होती है। जैविक खाद में प्रमुख रूप से ऑर्गेनिक कार्बन होता है और इसके साथ 17 प्रकार के पोषक तत्व शामिल होते हैं। रासायनिक खाद यूरिया में 46 प्रतिशत नाइट्रोजन और डीएपी में 18 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है और 46 प्रतिशत फास्फोरस। वैज्ञानिक श्री सिंह ने बताया कि जिस प्रकार मानव को स्वस्थ्य रहने के लिए दूध आवश्यक है ठीक उसी प्रकार फसलों के लिए ऑर्गेनिक कार्बन। खेती के लिए रासायनिक और जैविक उर्वरक दोनो की आवश्यकता होती हैं लेकिन दोनो में सामान्य उपलब्धता हो।

इनका कहना है –

रासायनिक उर्वरक, जैविक उर्वरक की दशा में खेतो की मिट्टी को ज्यादा खराब करता है । फसलों के लिए 6.5 प्रतिशत से 6.7 प्रतिशत PH अच्छा होता है। रासायनिक खेती पर पूर्ण रूप से किसानों का निर्भर होना चिंता जनक है हालांकि दोनों की उपयोगिता मानक के आधार पर हो तो फसल और खेत कि मिट्टी के लिए अच्छा साबित हो सकता है। 

– डॉ धनंजय सिंह ( कृषि वैज्ञानिक, सीधी )

जिले में यूरिया – डीएपी कि मांग लगातार बढ़ रही है इससे कभीं – कभी उपलब्धता न होने से दिक्कते सामने आती हैं। इस बार तीस नवंबर तक लगभग तीन हजार टन मांग की गई थी जिसमे तेईस सौ टन की उपलब्धता हो चुकी है और वर्तमान में बीस से वाइस टन उपलब्ध है। प्रतिदिन चार सौ से अधिक किसान आ रहे हैं और हम सौ से डेढ़ सौ ही किसानो को खाद उपलब्ध करा पा रहे हैं।

आनन्द पाण्डेय ( विपणन संघ अधिकारी, सीधी )

रासायनिक उर्वरक या केमिकल का अमानक मात्रा में फसलों पर उपयोग से वातावरण और मानव स्वास्थ्य में प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कई ऐसे उत्पाद बाजार में है जिन्हे अमानक मात्रा में केमिकल का उपयोग कर उपभोक्ता तक पहुंचाया जा रहा है जो किसी भी स्थिति में स्वास्थय के लिए उपयुक्त नहीं है।

– डॉ अनूप मिश्रा ( एम बी बी एस )