मॉडल के रूप में पहचान बना रही सीधी जिले के वनांचल क्षेत्र कि शासकीय स्कूल

0
591

मॉडल के रूप में पहचान बना रही सीधी जिले के वनांचल क्षेत्र कि शासकीय स्कूल

1937 से संचालित है पथरौला में विद्यालय, प्रदेश स्तर तक छात्र मार चुके हैं बाज़ी

समय INDIA 24 ( 8839245425 ) सीधी। हर अभिवावक अपने बच्चो को शिक्षा से वंचित नही रखना चाहता है और उसके लिए विद्यालय भेजना चाहता है। लेकिन जब बात शासन द्वारा संचालित विद्यालयों की आती है तो वहा कि तमाम अव्यवस्थाएं जेहन में आने लगती हैं। ऐसे हालातों में जब शासकीय विद्यालय एक माडल बन कर उभरे और निजी स्कूल से वापस शासकीय स्कूल में बच्चो को पढ़ने अभिवावक भेजना शुरू कर दे तो यह बात कुछ अचरज भरी लगती है। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर पथरौला में संचालित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिले में अपनी शैक्षणिक प्रदर्शन और व्यवस्थाओं से अन्य विद्यालयों कि तुलना पर माॅडल के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। इस विद्यालय को देखने पर यह कतई नहीं लगता कि इसकी देखेरख सरकारी लोग करते होंगे और बच्चो को पढ़ाते होगे। यह संभव विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य शैलेन्द्र सिंह और शिक्षकों के मेहनत से हुआ है।विद्यालय का आकर्षक प्रवेश द्वार, बाउण्ड्रीवाल से सुरक्षित परिसर, भवन की रंग-बिरंगी दीवारें, पढ़ने के लिए टेबिल – कुर्सियां, खेल के लिए मैदान और इसके अलावा दीवारों में छात्रों को शिक्षा के प्रति रुचि जगाने वाले सुविचारो को लिखा गया है। इस प्रकार संभव करने के लिए विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य शैलेन्द्र सिंह शालेय मदो का उपयोग और पंचायत का सहयोग लेने के साथ ही अपने वेतन का कुछ अंश विद्यालय के छात्रों और विद्यालय के व्यवस्थाओं में खर्च करते है।

अंग्रेजो के समय में स्थापित हुई थी विद्यालय 

ग्राम पथरौला पर वर्ष 1937 में प्राथमिक शिक्षा के लिए विद्यालय संचालित किया गया था। अंग्रेजो के शासन काल से संचालित पथरौला विद्यालय वर्ष 1962 में माध्यमिक शाला, वर्ष 1987 में हाई स्कूल और 25 जुलाई वर्ष 2008 में हायर सेकेण्डरी स्कूल हुई। वर्ष 1937 से 1990 तक कच्चे मकान मे यह विद्यालय संचालित होती रही। वर्ष 1990 के बाद धीरे धीरे विद्यालय का स्वरूप तेजी के साथ बदला और आज वर्तमान में दस गांव के 1300 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

  1. वर्ष 1937 अंग्रेजो के शासन काल से संचालित है पथरौला विद्यालय।
  2. • दस गांव के कक्षा 6 से 12वी तक 1300 अध्यनरत है छात्र – छात्राएं।
  3. • शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पथरौला हैं संकुल और जन शिक्षा केंद्र।
  4. • जन शिक्षा केंद्र में है 20 और संकुल में 15 विद्यालय।
  5. • विद्यालय में चपरासी पद में नही है शासकीय नियुक्ति, निजी वेतन से देते है प्राचार्य महिलाकर्मी को वेतन।
  6. • विद्यालय में कुल 10 शिक्षक – 02 क्लर्क, 09 अतिथि शिक्षक।
  7. • जन शिक्षको कि नही है तैनाती, प्रभार में शिक्षक।
  8. • उच्चतर माध्यमिक शिक्षा में कला और विज्ञान विषय।

प्रदेश स्तर तक छात्रों ने मारी है बाजी

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पथरौला के छात्रों ने प्रदेश स्तर तक बाजी मार चुके है। वर्ष 2019 में कक्षा 10 वी का छात्र अजय तोषराज प्रदेश में 9 वीं रैंक के साथ विद्यालय और जिले का नाम रोशन किया है। वर्ष 2021 में प्रदेश भर में सुपर हैंड्रेड अंतर्गत छात्रों का चयन किया गया जिसमे शासकीय विद्यालय पथरौला का छात्र शिवम गुप्ता इंदौर के लिए चयनित हुआ है। प्रभारी प्राचार्य शैलेन्द्र सिंह विद्यालय मे अध्यनरत छात्र – छात्राओं के शिक्षा सुधार और बौद्धिक स्तर को बढ़ाने के लिए ग्रेडिंग सिस्टम को अपनाया है और उनके प्रतिभा अनुसार ए, बी, सी, डी ग्रुप बनाया गया है। यही नही बल्कि बच्चो से शिक्षक और प्राचार्य लगातार संपर्क में रहते हैं । व्हाट्सएप में आने वाले बच्चो के सवालों का हल और जानकारी हर समय उपलब्ध कराया जाता है। विद्यालय में शिक्षको कि कमी के बाद भी अनुशासन और शैक्षिक गतिविधियों को लगातार शैलेन्द्र सिंह मानिटरिंग करते हैं। विद्यालय में लगभग 52% प्रतिशत छात्र और 48% छात्राएं अध्ययन कर रही है।

कोविड नियमो का पालन और टीकाकरण प्रोत्साहन

कोरोना कॉल में किसी भी प्रकार बच्चो को अव्यवस्था न हो इसके लिए ए, बी समूह के बच्चो को सोमवार मंगलवार बुधवार और सी, डी समूह के बच्चो को गुरुवार शुक्रवार शनिवार दिवस निर्धारित है । विद्यालय के सभी बच्चो को प्राचार्य शैलेन्द्र सिंह निजी वेतन से लगभग 3000 बाटल वितरित किया है जिससे बच्चे अपने अपने वाटल का पानी पिए और कोविड नियमो का पूरी तरीके से पालन हो सके उसके लिए जगह जगह सेनेटाइजर मशीन, एक समय में एक साथ भीड़ न हो जिससे निश्चित दूरी में पानी व्यवस्था एवं अन्य विभिन्न व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर विद्यालय का संचालन किया जा रहा है।

टीकाकरण को लेकर जिले के वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में भ्रम निर्मित था और प्रभासन को जन जागरूकता के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी । उस समय वनाचल क्षेत्र मझौली अंतर्गत पथरौला में सौ प्रतिशत और अन्य आस पास के दस ग्रामों में शत प्रतिशत दोनो डोज लगवाने के लिए प्राचार्य शैलेन्द्र सिंह ने जनजागरूक और टीकाकरण के लिए प्रोत्साहन का काम किया। विद्यालय में 1300 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं और उनके सभी अभिवावक दोनो डोज टीके लगवा चुके हैं। यही नहीं बल्कि हायर सेकेण्डरी में पढ़ने वाले 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के लगभग 20 बच्चो ने भी टीका लगवा लिया है।।

इनका कहना है –

विद्यालय के सभी छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने का प्रयास रहता है। खुशी होती है जब स्कूल के छात्र प्रदेश कि प्रवीणता सूची में चयनित होते है। सौभाग्य है कि जिस विद्यालय से मैने शिक्षा अध्ययन किया आज वही मैं प्राचार्य हूं। विद्यालय व्यवस्था हो या छात्रों के शिक्षा से जुड़ा हुआ, सभी अच्छा करने का प्रयास रहता है।         – शैलेन्द्र सिंह, प्रभारी प्राचार्य – शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पथरौला