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मुझे मालुम है, अंधे – गूंगो के शहर में तुम्हारा अख़बार बिकता है!
इसीलिए खरीदी हुई स्याही का लिखा कबाड़ बिकता है !!
अमित कुमार गौतम “स्वतंत्र”