महात्मा गांधी नरेगा योजना मजदूरों के लिए रोजगार गारंटी 

1
170

महात्मा गांधी नरेगा योजना मजदूरों के लिए रोजगार गारंटी 

जिले के श्रमिक मनरेगा से जुड़कर लाभ ले और जाने अपनी योजनाओं को – पीओ नरेगा प्रदीप शुक्ल 

 समय INDIA 24 (8839245425) सीधी। श्रम की साधना कर मजदूर निर्माण कार्यों में रंग भरते है। कारखाने, सड़कें, रेलगाड़ी के ट्रेक, बाँध, नहरें और वो सब जिससे हमारी रोज मर्रा की ज़िंदगी आसान होती है। ऐसे श्रमिको के लिए हम वर्ष भर में एक दिन मजदूर दिवस के रूप में मनाते है। यह दिन हमारे घर से लेकर खेत तक, मिलों से लेकर मीलों दूर तक पाए जाने वाले हर श्रमिक के संगठित होने और अपनी बेहतरी के लिए आवाज़ बुलंद करने का हो, ऐसा विद्वानों का मानना रहा है।

👉निष्पक्ष  पत्रकारिता एवं संचार के लिए स्वैच्छिक अनुदान करने मुझे क्लिक करे👈

महात्मा गाँधी नरेगा श्रमिकों के बेहतरी और उनके पलायन को रोककर आजीविका के संसाधन उपलब्ध कराने वाली उत्कृष्ठ योजना है। जिसके अंतर्गत प्रत्येक जॉबकार्डधारी श्रमिक परिवार द्वारा श्रमयुक्त कार्य माँगे जाने पर उसके गाँव मे ही स्थानीय स्तर पर सौ दिवस का निश्चित रोजगार एवम समय पर भुगतान हो इसकी जिम्मेदारी भारत सरकार से लेकर राज्य सरकारें तक ली हैं। महात्मा गाँधी नरेगा सबसे बड़ी सामाजिक समावेशी योजना है जिसे भारतीय संसद में अधिनियम के रूप पर 2005 में पारित किया गया। वर्तमान समय में मध्यप्रदेश के जाबकार्ड धारी श्रमिको को मजदूरी दर 204 रूपए प्रतिदिन मिल रही हैं।

जिले के श्रमिक लें मनरेगा से जुड़ें लाभ और जाने अपनी योजनाओं कोपीओ नरेगा प्रदीप शुक्ल

जिला पंचायत सीधी में पदस्थ नरेगा योजना के परियोजना अधिकारी प्रदीप शुक्ला कहते हैं कि महात्मा गांधी नरेगा योजना प्रत्येक जाबकार्ड धारी श्रमिक परिवारों के लिए 100 कार्य दिवस कि गारंटी देता है। जिले के प्रत्येक ग्राम पंचायतों में पंचायत प्रशासन द्वारा नरेगा योजना तहत काम दिया जा रहा है और उन्हें मनरेगा के लाभ के बारे में जागरूक किया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन ने 6 अप्रैल को राजपत्र जारी कर महात्मा गाँधी नरेगा से मजदूरों को मिलने वाली सेवाओं को लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम में भी शामिल किया है। अब मजदूरों द्वारा काम माँगने पर 15 दिवस में काम और जॉबकार्ड देना लोक सेवा गारंटी में होगा, काम न देने पर बेरोजगारी भत्ता भी देना होगा। सरकार ने और सशक्तता से इसे पाबंद किया है। ग्राम रोजगार सहायक और सचिव यह कार्य निर्धारित समय अवधि में करें इसकी निगरानी जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी करेंगे और ऐसा न होने पर सीईओ जिला पंचायत सभी प्रकरण का निराकरण कर नियमानुसार दोषियों को दंडित व विभागीय कार्यवाही करेगे। खेत तालाब, मेढ़ बंधान, भूमि समतलीकरण, फलोद्यान, बागवानी, पशु शेड, बकरी शेड, सुअर शेड , हितैषी कपिलधारा कूप जैसी हितग्राही मूलक योजना हैं। जिसमे सामान्य सी प्रक्रिया और दस्तावेज अपने ग्राम पंचायत के सचिव और रोजगार सहायक को देकर योजना का लाभ लिया जा सकता है। सुदूर सड़क, अप्रोच रोड, निर्मल नीर, तालाब डबरी निर्माण, नहर निर्माण, सामुदायिक वृक्षारोपण, मंदिर कुंज, मंदिर सरोवर, बोल्डर चेक डैम, चेक डैम, नर्सरी निर्माण, देवारण्य योजना, गौशाला, चारागाह निर्माण, वनीकरण जैसे सामुदायिक कार्यों के माध्यम से श्रमिकों को बड़े स्तर पर रोजगार दिया जाता है।

मनरेगा में कितने लाभान्वित- जिले में कुल 2 लाख 73 हजार श्रमिक पंजीकृत हैं जिसमे 1 लाख 17 हजार महिला श्रमिक हैं और वर्तमान में 2 लाख 13 हजार सक्रिय श्रमिक हैं। गत वित्त वर्ष में जिले में श्रमिकों को 54 लाख मानव दिवस सृजित कर रोजगार उपलब्ध कराया गया जिसमें मजदूरी में 98 करोड़ का व्यय किया गया। सरकार कुल श्रमिक में पचास फीसद से अधिक महिला श्रमिक नियोजन को प्रावधानित करता है। स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षण के साथ बागवानी और आजीविका सम्बंधित कार्य से लाभान्वित किया जाता है।सामाजिक अंकेक्षण कार्य मे विलेज सोशल एनिमेटर के रूप में महिलाओं का चयन कर कार्य दिया जा रहा है।

कौन हैं मनरेगा के लक्षित लाभार्थी-  अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला मुखिया परिवार सदस्य, बीपीएल कार्ड धारी, वनाधिकार पत्र धारक, विधवा, परित्यक्ता महिला, दिव्यांग जन और लघु एवं सीमांत कृषक जिनके पास 5 एकड़ से कम भूमि हो ऐसे सभी लोग मनरेगा में कृषि, जलसंवर्धन और आजीविका वर्धन के कार्य का लाभ ले सकते हैं। दिव्यांग और वृद्धजन भी इससे अछूते नहीं रहे है। दिव्यांग और वृद्धजन भी मनरेगा श्रमिक के रूप में पंजीकृत होकर काम माँग सकते हैं उन्हें उनकी क्षमता के अनुसार कार्य दिये जाने की व्यवस्था की गई है।

1 COMMENT

Comments are closed.