भाजपा ने रची ओबीसी आरक्षण खत्म करने की साजिश – कांग्रेस

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भाजपा ने रची ओबीसी आरक्षण खत्म करने की साजिश – कांग्रेस

कांग्रेस ने लगाये गंभीर आरोप, कहा – सरकार ने न्यायालय मे नहीं की पैरवी

समय INDIA 24 @ के जी पाण्डेय (7011972380) उमरिया। कांग्रेस ने भाजपा तथा राज्य सरकार पर ओबीसी आरक्षण को खत्म करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि अगर राज्य सरकार माननीय सुप्रीम कोर्ट मे सही तरीके से पक्ष रखती तो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मे ओबीसी आरक्षण पर रोकने लगने जैसी स्थिति से बचा जा सकता था। जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा मंगलवार को इस मुद्दे पर आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए मप्र कांग्रेस कमेटी के महासचिव अजय सिंह ने कहा कि शिवराज सरकार की इसी लापरवाही के कारण माननीय न्यायालय द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को समाप्त कर चुनाव कराने का निर्देश दिया है। प्रेसवार्ता मे जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश शर्मा, प्रवक्ता अशोक गौंटिया, रघुनाथ सोनी आदि उपस्थित रहे।

भागवत पहले ही दे चुके है संकेत – कांग्रेस महासचिव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के मामले का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश के पंचायत चुनाव मे ओबीसी आरक्षण को निरस्त कर दिया और शिवराज सरकार के वकील चुपचाप घटनाक्रम को देखते रहे। इससे साबित होता है कि यह एक सोची समझी साजिश है। भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की सोच हमेशा से आरक्षण को समाप्त करने की रही है। इससे पहले सरसंघ चालक मोहन भागवत भी ओबीसी आरक्षण समाप्त करने की बात कह चुके हैं। राज्य सरकार इसी एजेण्डे पर काम कर रही है।

पिछडे वर्ग को पहुंचा धक्का – पूर्व विधायक अजय सिंह ने कहा कि आरक्षण निरस्त होने के फैसले से अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को गहरा धक्का पहुंचा है। अपने षडय़ंत्र, गलतियों और अन्य पिछड़ा वर्ग विरोधी चरित्र को छुपाने के लिए बीजेपी कांग्रेस पर झूठे इल्जाम लगा रही है। मध्यप्रदेश के पंचायत चुनाव को लेकर कांगेस पार्टी सुप्रीम कोर्ट या माननीय उच्च न्यायालय मे नही गई थी। इस बात को कांग्रेस पार्टी ने 6 दिसंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय मे आयोजित पत्रकार वार्ता मे स्पष्ट शब्दों मे सार्वजनिक कर दिया था। संबंधित पक्षकार निजी हैसियत मे माननीय अदालत मे गए थे। कांग्रेस पार्टी ने ग्राम पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के असवैधानिक पक्षों का विरोध किया था और उन्हें सार्वजनिक किया था लेकिन कांग्रेस ने चुनाव का विरोध नहीं किया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य निर्वाचन आयोग से यही बात कही है कि चुनाव मे संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाए।

रोटेशन प्रणाली पर सवाल –  उच्चतम न्यायालय मे पक्षकारों ने रोटेशन प्रणाली पर सवाल उठाया था जो कि ओबीसी आरक्षण से भिन्न विषय है। इस विषय को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता सरासर झूठ बोल रहे है। जब माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण खत्म करने का फैसला सुनाया तो यह मध्यप्रदेश सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह आरक्षण के समर्थन मे उचित तर्क माननीय न्यायालय मे पेश करती। लेकिन मध्यप्रदेश सरकार के वकीलों ने जानबूझकर अदालत मे ऐसा नहीं किया। यह एक सुनियोजित षडय़ंत्र है।

पहले भी करते रहे हैं गड़बडिय़ां- शिवराज सरकार का ओबीसी विरोधी रवैया पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले नौकरियों मे आरक्षण के मामले मे हाईकोर्ट मे चल रही सुनवाई मे भी सरकार की ओर से वकील पेश नहीं हुए और मामले की सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए टल गई। वर्ष 2003 मे जब कांग्रेस सरकार ने प्रदेश मे ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया था, तब भी भाजपा की सरकार ने अदालत मे ढंग से पैरवी ना करके आरक्षण को समाप्त हो जाने दिया था। 2019 मे जब माननीय कमलनाथ जी की सरकार ने एक बार फिर से ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया तो उसे भी समाप्त करने के लिए भाजपा सरकार जानबूझकर उच्च न्यायालय मे सही तरीके से पैरवी नहीं कर रही है। ठीक यही तरीका पंचायत चुनाव मे ओबीसी आरक्षण निरस्त कराने के लिए भी शिवराज सरकार ने अपनाया है। असल मे भाजपा और आरएसएस के आरक्षण को खत्म करना चाहते है। आरएसएस के नेता समय-समय पर आरक्षण की समीक्षा और आरक्षण को खत्म करने के बयान जारी करते रहते भी रहते है।

जानबूझ किया गया षडय़ंत्र- भारतीय जनता पार्टी ने जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया मे ऐसी असंवैधानिक गलतियां छोड़ दी थी जिनसे ओबीसी के हित प्रभावित हो। भाजपा सरकार को इस मामले मे सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करके तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए ताकि ओबीसी वर्ग के लोगों को पंचायत मे उनका हक मिल सके। माननीय कमलनाथ जी के नेतृत्व मे कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश के ओबीसी वर्ग को उसका हक दिलवाने के लिए कृत संकल्प है। कांग्रेस सड़क से संसद तक संघर्ष करेगी और सामाजिक न्याय की लड़ाई को जारी रखेगी। ओबीसी आरक्षण को समाप्त करने का भाजपा का षडय़ंत्र कभी पूरा नहीं होगा।