नेताओ को नही दिख रही नदियों पर मशीनीकरण और रेत ठेकेदार कि मनमानी

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नेताओ को नही दिख रही नदियों पर मशीनीकरण और रेत ठेकेदार कि मनमानी

रेत पर खनिज अधिकारी ने साधी चुप्पी, कहा बोलने पर शासन से मनाही

ए के स्वतंत्र (8839245425) समय INDIA 24 @सीधी। जिले में चल रहे अवैध तरीके से रेत कारोबार व उत्खनन – परिवहन को लेकर प्रशासन ठोस कार्यवाही करने में नाकाम रहा है, चाहे वह वैध खदानों में अवैध तरीके से मशीनों का उपयोग कर हो रहे उत्खनन को लेकर ही क्यों न हो! ऐसा इसलिए भी कि जिले में विपक्षीय पार्टियों के नेताओ ने चुप्पी साध रखी है। जिस वजह से रेत माफियाओं और कारोबारियों की मनमानी पर कोई लगाम नहीं लग पा रहा है। रेत कारोबारी मशीन लगाकर नदियों का सीना छलनी कर रहे हैं और जलीय जीवों का जीवन संकट में डाल दिया है। यही नही बल्कि मशीनों से हो रहे उत्खनन के कारण नदियों का स्वरूप भी बदलता जा रहा है।

जिले में वोट बैंक कि राजनीति करने वाले सत्ता व विपक्ष दोनो दलों के नेताओ ने रेत माफियाओं और मशीनों के द्वारा हो रहे उत्खनन को लेकर आंख में पट्टी बांध ली है। अब नेताओ को न कुछ गलत होते दिखाई दे रहा है और न ही उन्हे मजदूरी के लिए फैले हुए जिले के हजारों मजदूरो के हांथ। सैनिक इंडस्ट्रीज को मिली जिले कि रेत खदानों में मनमानी तरीके से खुलेआम रेत का उत्खनन किया जा रहा है और रेत ठेकेदार को एनजीटी नियम व गहराने वाले जल संकट से मानव और जीवो में पड़ने वाले प्रभाव कि न चिंता है । जिला प्रशासन कि अनदेखी और नेताओं कि चुप्पी से सैनिक इंडस्ट्रीज के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि निर्धारित रेत दर से ज्यादा मूल्य पर महंगी रेत बेची जा रही है। अनुसूचित जाति, जनजाति जाति वर्ग के लोगो को मिलने वाली रियायत भी रेत ठेकेदार के गुर्को पर निर्भर हो गई है।

सूत्रों कि माने तो कलर युक्त पोशाक धारकों के संरक्षण में कथित ठेकेदारों द्वारा पेटी में रेत ठेकेदार से खदाने लेकर संचालित कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन नेताओ के दवाब के कारण कार्यवाही करने से गुरेज करता रहा है। जिले में महंगी रेत, वैध खदानों में मनमानी तरीके से उत्खनन, अवैध उत्खनन, ओवर लोड परिवहन और मजदूरों के बजाए मशीनों से उत्खनन जैसे मामले विगत वर्षो से मीडिया व आंदोलनों के माध्यम से प्रखरता के साथ शासन – प्रशासन तक पहुंचता रहा है लेकिन विपक्ष कि शून्यता से जिले कि जनता को मंहगी रेत कि मार जेब काट रही है। अवैध उत्खनन परिवहन पर खनिज अधिकारी मीडिया के सामने बोलने से बचने लगे हैं यह कह कर कि शासन स्तर से मीडिया को वर्जन देने से प्रतिबंधित कर दिया गया है? सवाल यह उठता है कि जिले में विपक्ष कि शून्यता कब तक रहेगी और रेत कि मलाई वाली चादर से नेताओ का मुखौटा बाहर आएगा? सवाल यह कि वास्तविक तौर शासन ने रेत पर मीडिया को वर्जन देने खनिज अधिकारियों को प्रतिबंधित कर दिया है या फिर खुद को बचाने खनिज अधिकारी शासन कि छवि धूमिल कर रहे हैं?

इनका कहना है –

हमे शासन द्वारा वर्जन देने से मना किया गया है जिससे वर्जन नही दे सकती।

– दीपमाला त्रिपाठी, खनिज अधिकारी, सीधी

कांग्रेस समय – समय पर जनता कि आवाज उठाती है। सुनना शासन – प्रशासन का काम है। जिला कांग्रेस भी प्रखरता के साथ आवाज़ उठाए। प्रशासन को जाकर खदानों में देखना चाहिए कि रॉयल्टी शासन को कितनी जा रही है और रेत कि दर क्या है। महंगी रेत जनता कि कमर तोड़ रही है और सत्ताधारी पार्टी के नेता मौज उड़ा रहे हैं।

लालचन्द गुप्ता, प्रदेश उपाध्यक्ष, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी