तीनो कृषि कानून किसान विरोधी, सरकार ले वापस – उमेश तिवारी

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तीनो कृषि कानून किसान विरोधी, सरकार ले वापस – उमेश तिवारी

 

समय INDIA 24, सीधी। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में एस डी एम कार्यालय मझौली में भारी बारिश के बाद भी किसान संसद का आयोजन किया गया। आक्रोशित किसानों ने किसान संसद में मोदी सरकार द्वारा बनाए गए तीनो किसान विरोधी कानूनों को सर्वसम्मति से निरस्त करने का फैसला किया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि तीनो काले कृषि कानून को मोदी सरकार द्वारा निरस्त नहीं किया गया तो आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।

किसान संसद को संबोधित करते हुए टोंको-रोंको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कहा की पूंजीपतिवर्ग अपनी अकूत पूंजी को लेकर कहां जाएं उसे सिर्फ किसानों की जमीन दिखाई दे रही है। वह किसानं की जमीन छीनना चाह रहा है। कंपनियों के मालिकों की गिद्ध दृष्टि किसानों की जमीन पर लगी हुई है और देश की फासीवादी मोदी सरकार कंपनियों के साथ मिलकर देश के किसानों की जमीन लूटने के लिए तीन काले कानून बना चुकी है जिसके खिलाफ आज पूरे देश का किसान सड़क पर उतर कर संघर्ष कर रहा है। दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन पुरे देश में आंदोलन हो रहा है हम आज की इस किसान संसद के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों किसान विरोधी कानूनों का विरोध करते हैं और केंद्र सरकार से किसान विरोधी कानून निरस्त करने की मांग करते है। किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वादा करने वाली सरकार किसानों से उनकी जमीन छीनने का षड्यंत्र रच रही है।

उमेश तिवारी ने कहा कि जमीन की लूट से सबसे अधिक आदिवासी प्रभावित है। आदिवासियों के समक्ष अपने अस्तित्व को बचाए रखने का संघर्ष है। पूरे देश भर के वनों से वनवासी जिन प्रमुख वजहों से बेदखल किए जा रहे हैं उनमें से पहली बड़ी वजह है खदानें। घने वनों की भूमि के गर्भ में जो खनिज संचित है औद्योगिकीकरण के लिए खनन से उड़ीसा, झारखंड, बस्तर और मध्यप्रदेश के सिंगरौली इलाके में बड़ी संख्या में वनवासियों की बेदखली हुई और अभी भी बेदखली की योजना है।

उद्योगपतियों ने मुआवजे के मोहजाल में फंसाकर वनवासियों को नर्क में धकेलने का काम किया है। सिंगरौली विस्थापन का क्रूर उदाहरण है। इसी तर्ज में देश के अन्य हिस्सों में हो रहा है। प्रभावित या तो भिखारी हैं या फिर महानगरों के गंदी वस्तियों में रहने वाले मजदूर है।वनवासियों को बेदखल करने और कंगाल बनाने की कथा हर सौ कोस में मिल जाएगी। कहीं बड़े बाँधों के लिए बेदखल किया जा रहा है तो कहीं नेशनल पार्क और अभयारण्यों के लिए। जंगल में जानवर के हिफाजत की चिंता है मनुष्य की नहीं। वह मनुष्य जो युगों से जानवरों और प्रकृति के साथ सह अस्तित्व जीवन जी रहा था उसे आज जानवरों का दुश्मन करार कर दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एकता परिषद की सरोज सिंह ने क्षेत्रीय समस्याओ पर चर्चा करते हुए मूसामूडी भुमका, संजय टाइगर रिजर्ब, गुलाब सागर बांध और समदा फार्म के पीड़ितों का मुद्दा उठाया।किसान संसद को संतोष जी, सुंदर सिंह, द्वारिका बैस, मनोज कोल, शिवकुमार सिंह, रामनरेश कुशवाहा, सुमन जी, जयपाल कोरी, शिवकुमार, रोहित सिंह, रंदमन सिंह, उमा सिंह, रंगदेव कुसवाहा, धर्मराज सिंह, घनस्याम दीक्षित, शिवमणि तिवारी ने संबोधित किया।