झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार, कहीं विभागीय पनाह तो नहीं?

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 झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार, कहीं विभागीय पनाह तो नहीं?

क्लीनिक नही मिनी अस्पताल संचालित कर रहे बिना डिग्री के डॉक्टर साहब

अमित कुमार “स्वतंत्र”@ समय INDIA 24, सीधी। जिले में लगातार झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या में इज़ाफा हो रहा है आलम यह है कि गांव की गलियों से लेकर शहर तक इन झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिक संचालित है और ये झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी डिग्री लिए व पढ़ाई किए छोटे से छोटे और बड़े से बड़े हर मर्ज का उपचार कर रहे हैं। जिला स्वास्थ्य प्रशासन के नाक के नीचे संचालित ये झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिक में एक नही दो नहीं बल्कि आधा दर्जन से अधिक मरीजों को भर्ती करने व उपचार करने बेड रखे हुए हैं और बकायदा डॉक्टर साहब उपचार कर रहे हैं। बहुतायत मात्रा में उपजे इन चिकित्सको में कुछ ऐसे है जिनके पास कोई डिग्री नहीं है तो कुछ के पास इलेक्ट्रो होम्यो पैथी का डिप्लोमा है और एलोपैथी पद्धति से उपचार कर रहे हैं। कोई मरीज थोड़ा ठीक भी है और इनके इलाज से अगर वो और भी ज्यादा बीमार पड़ जाए तो इससे डॉक्टर साहब को कोई परवाह नहीं होता और न ही किसी प्रकार का डर। भला डर कैसे हो जब जिला स्वास्थ्य प्रशासन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ और सिर्फ दिखावे तक ही सीमित हो। कुछ ऐसे भी इलेक्ट्रो होम्यो पैथी के नाम से संचालित क्लीनिक है जिनके विरुद्ध COVID 19 के दौरान कार्यवाही हुई तो थी लेकिन स्थान बदल कर वो वापस क्लीनिक कुछ ही दिन में संचालित हो गई और बकायदा जिला प्रशासन को सूचना दे कर की मैं क्लीनिक का संचालन कर रहा हूं। लेकिन जिले के आला स्वास्थ्य अधिकारी व विभाग के अन्य अधिकारी निरीक्षण करना उचित नहीं समझते की वहा इलेक्ट्रो होम्यो पैथी पद्धति से उपचार हेतु संचालित क्लीनिक में इलेक्ट्रो होम्यो पैथी पद्धति से ही उपचार हो रहा है या फिर एलोपैथी पद्धति से।

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झोलाछाप डॉक्टरों के झांसे में गरीब तबके के लोग

गांव हो या फिर शहर वार्ड – वार्ड में संचालित झोलाछाप क्लीनिक के संचालकों का लक्ष्य मानव सेवा नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ पैसे कमाना होता है। यही वजह है कि आए दिन गरीब तबके के लोग या फिर कांस्ट्रक्शन में काम करने वाले मजदूर इन डॉक्टरों के उपचार का शिकार हो जाते हैं और अपनी जान तक गंवा बैठते हैं। इसके बावजूद भी झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्यवाही हेतु विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।

छापेमारी से पहले क्लीनिक संचालको को मिल जाती है जानकारी

सूत्रधार का कहना है कि जब किसी झोलाछाप डाक्टर व संचालित क्लीनिक के विरुद्ध शिकायत की जाती है तो ये सूचना संचालक तक आसानी से पहुंच जाती है। यही वजह होती है की शिकायक व सूचना प्राप्त होने के बाद प्रशासन कार्यवाही करे उसके पहले डॉक्टर साहब चौकन्ने हो जाते हैं या फिर बंद कर क्लीनिक गायब। सूत्रधार का कहना है कि ये बेखौप झोलाछाप डॉक्टर अपना विभागीय मुख्यालय तक अपना तंत्र बना रखा है जिससे कई बार कठोर कार्यवाही होने से पहले बिना डिग्री के डॉक्टर साहब बच जाते हैं।

इनका कहना है –

BMO कार्यालय से ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों की सूची मगाई जा रही है, अनाधिकृति डॉक्टरों और क्लीनिक संचालकों के विरुद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।

– हर्षल पंचोली
अपर कलेक्टर, सीधी (म.प्र.)

यह गलत है और इसका कारण है चिकित्सको की कमी, गरीबी और दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकीय व्यवस्था का सुदृढ़ न होना। मरीज कम पैसे में ठीक होना चाहता है और यही कारण जीवन के लिए मुसीबत बन जाती है जब झोलाछाप डॉक्टर या अन्य जो पूर्ण अनुभव नही रखते वो हर मर्ज का और अतिरिक्त उपचार करने लगते है। इनका जन स्वास्थ्य रक्षक के रूप स्किल डेवलपमेंट किया जाए जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण के बाद कर सके।

– डॉ अनूप मिश्रा
जिला सचिव – इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, सीधी (म.प्र.)

बहुतायत मात्रा में झोलाछाप डॉक्टरो की संख्या हो गई है जिनके पास कोई वैध डिग्री नहीं है। ऐसे बिना अनुभव के चिकित्सको से उपचार कराना जीवन को जोखिम में डालना है।

– मनोज सिंह चौहान
अध्यक्ष – म.प्र. फार्मेसी एशोसिएशन जिला सीधी (म.प्र.)

COVID 19 संक्रमण अभी खत्म नहीं हुआ है किसी प्रकार लक्षण समझ आते हैं तत्काल नजदीकी चिकित्सालय में परीक्षण कराए जिससे उपयुक्त उपचार संभव हो पाएगा अन्यथा झोलाछाप डॉक्टरों के उपचार या बिना परीक्षण के उपचार से स्वास्थ्य का और भी ज्यादा बिगड़ने कि संभावना रहती है।

– डॉ. के. पी. सिंह
प्रदेश उपाध्यक्ष – COVID 19 स्वास्थ्य संगठन, मध्यप्रदेश

झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध प्रशासन को कार्यवाही करना चाहिए। इस महामारी के दौर में थोड़ी सी भी लापरवाही जीवन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है बिना परीक्षण कराए उपचार न कराए मरीज। इलेक्ट्रो होम्योपैथी यदि अपनी पद्धति से हट कर अन्य पद्धति से उपचार कर रहे तो यह विधिक कार्यवाही के पात्र हैं।

– डॉ. रविशंकर शुक्ल
जिला अध्यक्ष – आयुष स्वास्थ्य संगठन, सीधी (म.प्र.)

अमर इलेक्ट्रो होम्योपैथी में हो रहा एलोपैथी पद्धति से उपचार

शहर के पटेल पुल समीप नियमों को ताक में रख संचालित अमर इलेक्ट्रो होम्योपैथी में एलोपैथी पद्धति से उपचार किया जा रहा है। इलेक्ट्रो होम्योपैथी पद्धति से उपचार से डॉक्टर साहब का शायद अब मन ऊब गया है और वो एलोपैथी पद्धति से उपचार कराना शुरू कर दिया है। डॉक्टर साहब से जब समाचार पत्र के प्रतिनिधि द्वारा पूछा गया कि आप इलेक्ट्रो होम्योपैथी पद्धति से उपचार करने के बजाए एलोपैथी पद्धति से उपचार कर रहे हैं? डॉक्टर साहब कहते हैं कि शासन द्वारा मान्यता दे दी गई है। क्लीनिक में डॉक्टरों के पर्ची पर और कुछ अपने से उपचार किया जाता है । सवाल के घेरे में आते ही अमर इलेक्ट्रो होम्योपैथी संचालक स्वीकारते है कि मेरे यहां को चिकित्सक नही बैठता है अर्थात समझा जा सकता है कि डॉक्टर साहब इल्क्ट्रो होम्योपैथी के आड़ मे बिना चिकित्सकीय अनुभव के एलोपैथी की दवा मरीज को पिला रहे हैं और उन्हें यह बिल्कुल फर्क नहीं पड़ता कि मरीज ठीक होगा या फिर और बीमार। सूत्रों की माने तो कोरोना संक्रमण के दूसरे लहर के दौरान प्रशासन द्वारा संबंधित क्लीनिक के विरुद्ध कार्यवाही की गई थी लेकिन कुछ ही समय बाद जिला प्रशासन के नाक के नीचे वापस स्थान परिवर्तन कर संचालन शुरू कर दिया गया है।

अमर इलेक्ट्रो होम्योपैथी बना मिनी चिकित्सालय

अमर इलेक्ट्रो होम्योपैथी एवं योगा क्लीनिक मिनी चिकित्सालय के तर्ज पर संचालित हो रही है। संचालित क्लीनिक से थोड़ी ही दूर में डॉक्टर साहब का मिनी चिकित्सालय है जहा डॉक्टर साहब मरीजों को बकायदा भर्ती कर उपचार करते हैं । यह तब हो रहा है जब जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त रखने का ढोल पीटा जा रहा हो। इलेक्ट्रो होम्योपैथी क्लीनिक में एलोपैथी पद्धति से उपचार कर गरीब लोगो के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है । अब देखना यह होगा कि जिले में अवैध रूप से संचालित क्लिनिको के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा त्वरित ठोस कार्यवाही की जाती है या फिर किसी अनहोनी का इंतजार।

इलेक्ट्रो होम्योपैथी को लेकर क्या है स्वास्थ्य संचालनालय के आदेश

स्वास्थ्य संचालनालय के आदेश में इलेक्ट्रो होम्योपैथी को लेकर साफ और स्पष्ट उल्लेख है कि इन पद्धतियों के चिकित्सा व्यवसायी केवल अपनी पद्धति में ही चिकित्सा व्यवसाय कर सकते हैं न कि किसी अन्य पद्धति से। इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा व्यवसाय करने के लिए होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल एक्ट 1973 की दूसरी/तीसरी अनुसूची में मान्य आह्रताधारी का भी उपचार करने के लिए सेंट्रल काउंसिल ऑफ होम्योपैथी मध्यप्रदेश अंतर्गत पंजीयन होना अनिवार्य है। इलेक्ट्रो होम्योपैथी अहर्ता अधिमान “डॉक्टर” शब्द का उपयोग करने पात्र नहीं है यदि ऐसा करते है तो इनके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान है।

इनका कहना है –

स्वास्थ्य संचालनालय से मान्यता प्राप्त हो गई है समाज और प्रशासन क्या समझता है उन पर निर्भर है। मेरे यहां एलोपैथी पद्धति से उपचार होता है। क्लीनिक में मेरे कोई एलोपैथी चिकित्सक नही बैठता ।

– संचालक
अमर इलेक्ट्रो होम्योपैथी एवं योगा क्लीनिक, पटेल पुल सीधी (म. प्र.)