जिले से ग्राम स्तर तक सामुदायिक जागरुकता के लिए हो संस्थाओं में भी परामर्श सत्र एवं संगोष्ठी – डॉ. बी.एल. मिश्रा

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जिले से ग्राम स्तर तक सामुदायिक जागरुकता के लिए हो संस्थाओं में भी परामर्श सत्र एवं संगोष्ठी – डॉ. बी.एल. मिश्रा

जिला चिकित्सालय में स्तनपान परामर्श कक्ष के साथ विश्व स्तनपान सप्ताह पर सीएमएचओ ने दी जानकारी

समय INDIA 24, सीधी। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सीधी डॉ. बी.एल. मिश्रा द्वारा 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होने बताया कि जिला अस्पताल में स्तनपान परामर्श कक्ष की स्थापना की गई है, यहां पर समस्त ए.एन.सी. पी.एन.सी. एवं अन्य महिलाओं को स्तनपान के महत्व के संबंध में परामर्श देने का कार्य किया जाएगा। बच्चों के सर्वागिण मानसिक एवं शारीरिक विकास हेतु स्तनपान अत्यंत महत्वपूर्ण है, यह शिशु मृत्यु दर एवं बाल मृत्यु दर के प्रकरणों में कमी लाने में सहायक है साथ ही आजीवन सामाजिक व आर्थिक विकास में सुधार हेतु स्तनपान प्रमुख पड़ाव है। यह साक्ष्य आधारित है कि जन्म के एक घंटे के भीतर शीघ्र सुरक्षित स्तनपान कराने व प्रथम छः माह केवल स्तनपान कराने से नवजात शिशु में आम बाल्य कालीन बीमारियां जैसे दस्त रोग एवं निमोनिया के खतरे में क्रमशः 11 से 15 प्रतिशत कमी लाई जा सकती है।

वर्तमान कोविड-19 महामारी काल में यह और अधिक मायने रखता है जब कोविड-19 की चुनौतियों से स्वास्थ्य एवं पोषण गतिविधियां बाधित हुई है। प्रसव उपरांत मां और शिशु कों एक साथ रख त्वचा से त्वचा के संपर्क एवं सुरक्षित स्तनपान कराने से नवजात में कोरोना संक्रमण एवं अन्य बीमारियों के जोखिम में काफी हद तक कमी संभव है। विश्व स्वास्थ्य संगठन अनुसार कोरोना से संक्रमित, संदिग्ध मां के दूध के माध्यम से कोरोना संक्रमण के फैलाव की पुष्टि नही हुई है, इसलिए ऐसी स्थिति में नवजात शिशु को स्तनपान नही कराना या रोकने का कोई औचित्य नहीं है। स्तनपान जारी रखने से धात्री माताओं के स्वास्थ्य में सुधार होता है। मौजूदा कोविड-19 महामारी को दृष्टिगत रखते हुए जन्म के एक घंटे के भीतर शीघ्र स्तनपान व प्रथम छःमाह केवल स्तनपान को बढ़ावा देने हेतु जिले के समस्त प्रसव केन्द्रों, जिला अस्पताल, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में परामर्श सत्र तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों में पदस्थ सी.एच.ओ. के द्वारा ग्राम स्तर पर संगोष्ठी चर्चा द्वारा जागरुकता गतिविधियों को दिनांक 1 से 7 अगस्त 2021 के दौरान विश्व स्तनपान सप्ताह में व्यापक स्तर पर करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

मॉ का पहला पीला गाढा दूध बच्चे का पहला प्राकृतिक टीकाकरण हैं । शीघ्र स्तनपान (जन्म के एक घंटे के भीतर) से मां के शरीर से नवजात शिशु को गर्मी मिलती है। प्रसव के बाद तत्काल स्तनपान शुरू करने से गर्भाशय के संकुचन, आंवल (प्लासेंटा) के निकलने तथा रक्तस्राव को कम करने में मदद मिलती है। मां व बच्चे को प्रसव के बाद एक साथ रखा जाना चाहिये जिससे स्तनपान जल्दी आरम्भ कराने में सुविधा हो। कोलोस्ट्रम या खीस शुरूआत में निकलने वाला पीला गाढ़ा दूध होता है। यह माँ के स्तनों में, शिशु के पैदा होते ही उतरता है। यह पहले कुछ दिनों तक कम मात्रा में होता है, पर नवजात शिशु की जरूरतों के लिए काफी होता है। यह शिशु के जन्म के बाद 3-4 दिन तक निकलता रहता है और उसके बाद सामान्य दूध में बदल जाता है। यह शुरू का पीला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे के लिए अत्यंत पोषक और आवश्यक होता है। इसमें शिशु की वृद्धि में सहायक पर्याप्त मात्रा में सारे पौष्टिक तत्व होते हैं। नवजात शिशु को दस्तों में, सांस की बीमारी से और अनेक संक्रमणों से बचाता है एवं संक्रमण की गंभीरता को कम करता है। इसमें विटामिन ‘‘ए’’ और ‘‘के’’ अधिक मात्रा में होते हैं। यह नवजात शिशु को पीलिया से बचाने में मदद करता है। शिशु की आंतों की सफाई में मदद करता है। (हरे दस्त ठीक करता है) – एलर्जी से बचाता है। स्तनपान से पहले कोई भी पेय शिशु को संक्रमित कर सकते हैं यह चीनी का शरबत, शहद, मक्खन, ग्लूकोज का पानी , घुट्टी आदि कुछ भी हो सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी शिशु के जन्म के तीसरे दिन स्तनपान कराया जाता है क्योंकि यह एक रिवाज है कि ननद आकर माँ के स्तन को धोती है, उसके बाद माँ को अपने बच्चे को दूध पिलाने की अनुमति होती हैं। आँगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं के लिए यह जरूरी है कि वे अपने समुदाय में माँ बनने वाली हर स्त्री के घर की बड़ी – सास, माँ, दादी आदि को भी स्तनपान में मदद के लिए तैयार करें व गलत भ्रातियों एवं अंधविश्वासों को दूर करने में घर की महिलाओं को शिक्षित करने में विशेष भूमिका निभाएं । शिशु के पिता को प्रेरित व शिक्षित करने की भी जरूरत है। समुदाय में हर घर में जानकारी पहुॅचाएं कि शिशु के लिए मां का दूध सर्वोत्तम आहार है। जन्म के एक घंटे के भीतर मॉ का पहला पीला गढ़ा दूध अवश्य पिलाये। शिशु को शहद, घुट्टी, चाय, पानी आदि कुछ भी न दें। छः माह तक ‘‘केवल स्तनपान’’ करायें। गर्मी के मौसम में भी शिशु को पानी न दें क्योंकि मां के दूध से बच्चे को पर्याप्त पानी मिल जाता है। बच्चा या मां के बीमार रहने पर भी स्तनपान कराना जारी रखें। दो वर्ष तक या उससे अधिक समय तक स्तनपान कराना जारी रखें।