एकात्मक पर्व आचार्य शंकर जीवन दर्शन पर व्याख्यान का हुआ आयोजन

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एकात्मक पर्व आचार्य शंकर जीवन दर्शन पर व्याख्यान का हुआ आयोजन

समय INDIA 24 @ सीधी अद्वैत वेदांत के प्रणेता भारत की अखंडता एवं एकता के द्वारा सनातन समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए अकल्पनीय अद्भुत शिव के अवतार आचार्य शंकर की जयंती के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद जिला सीधी द्वारा एकात्मक पर्व आचार्य शंकर जीवन दर्शन पर व्याख्यान का आयोजन रोली मेमोरियल जिला सीधी में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ लहरी सिंह द्वारा शंकराचार्य जी के बताए हुए रास्ते में समाज को चलने के लिए प्रेरणा दी गई।उन्होंने अपने व्याख्यान में आदि शंकराचार्य जी के सामाजिक समरसता पर बल देते हुए यह बताया गया कि सभी समान है, सभी बराबर हैं, जाति भेदभाव और बुराइयों को दूर कर हम इस आयोजन के संदेश को समाज में पहुंचा सकते हैं। हिंदू समाज में छुआछूत के कारण कई बुराइयां पैदा हुई और समाज बटा तथा सनातनी समाज के कई लोगों ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया जबकि सनातन और बौद्ध है एक ही रीति नीति से चलते हैं किंतु बौद्ध धर्म छुआछूत ना होने के कारण सनातनी बौद्ध धर्म को स्वीकार किया। हमारे आचार व्यवहार में जाति वर्ण जैसे अहंकार नहीं होने चाहिए। आदि शंकराचार्य 16 वर्ष की उम्र में 35 ग्रंथों की रचना की सामान्य नहीं है बल्कि यह विलक्षण प्रतिभा मानी जानी चाहिए।

अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्र मोहन गुप्ता द्वारा अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा गया कि आदि गुरु शंकराचार्य के जीवन एवं कृतित्व हम अगर अपनाते हैं तो बिना कुछ किए ही हमारे समाज में जो बुराइयां हैं वह अपने आप समाप्त हो जाएंगी तथा अखंड भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना तथा स्वप्न अपने आप पूरा हो जाएगा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि विनय सिंह बिन्नू द्वारा आचार्य शंकर के जन्म हो सही मानते हुए मृत्यु के बारे में निश्चित ना होना बताया गया क्योंकि कोई ग्रंथ ऐसा नहीं है जो प्रमाणिकता से यह कह सके कि आचार्य शंकर की मृत्यु हुई है अतः आचार्य शंकर अमर रहे हैं। जब बौद्ध धर्म उफान पर था तब आचार्य शंकर का जन्म हुआ जिन्हें शिव का अवतार माना जाता है। उनके द्वारा चार मठों की स्थापना कर पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया गया। मंडल मित्र से शास्त्रार्थ पर काया प्रदेशम एवं कुंभ और महाकुंभ का शुभारंभ कर उन्होंने सनातन को अजय बना दिया।

वही विशिष्ट अतिथि के रूप में अधिवक्ता डॉ बद्री प्रसाद मिश्र द्वारा आचार्य शंकर के जीवन में प्रकाश डालते हुए बताया कि जल की बूंद जब सागर में मिल जाती है तो वह बूंद नहीं सागर कहलाती है, सनातन धर्म भी इसी प्रकार से हैं इसमें जो भी है वह बहुत बड़े समाज का हिस्सा है। कार्यक्रम में उपस्थित डॉ अनूप मिश्रा द्वारा आदि शंकराचार्य जी के द्वारा बहुत कम उम्र में हासिल की गई उपलब्धि के बारे में प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि संपूर्ण भारत को एक करने का लक्ष्य लेकर तथा सनातन संस्कृति सनातन धर्म को पुनरू स्थापित करने हेतु आदि शंकराचार्य जी ने कार्य किया। भगवान कृष्ण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान कण-कण में व्याप्त हैं आदि शंकराचार्य जी ने इसी परिकल्पना को साकार करने के लिए चार मठों में अलग-अलग क्षेत्रों के पुजारियों को रखा गया जिससे कि भारत अखंड बना रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक शिवदत्त उर्मलिया द्वारा अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम का सफल संचालन महेंद्र द्विवेदी द्वारा किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु डॉ मनोज सिंह एवं अमित गौतम स्वतंत्र का विशेष सहयोग रहा।