अण्डे की जगह मुनगा कुपोषण से जंग के लिए होगा हितकर

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अण्डे की जगह मुनगा कुपोषण से जंग के लिए होगा हितकर

विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में अन्य सब्जियों से लाभप्रद मुनगा की सब्जी व कढ़ी

अमित कुमार गौतम “स्वतंत्र” (पत्रकार एवं रचनाकार) प्रदेश में दिनों दिन कुपोषण का बढ़ता स्तर वास्तविक तौर पर चिंता का विषय है। हाल ही में सुनने को मिला कि प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों में अंडे परोसने की तैयारी कर रही है। कुपोषण से जंग लड़ने के लिए सरकार चिंतित है यह अच्छी बात है। आंगनबाड़ी केंद्रों ‌मे अंडे परोसने से कुपोषण दूर होगा या नहीं लेकिन परिणाम सरकार के खजाने खाली होने के जरूर दिखेंगे। मध्यप्रदेश सरकार के खजाने जब ऋणात्मक स्थिति में और बेजोजगारी सीमाएं लांघ चुकी हो ऐसे में इस प्रकार के योजनाओ पर सरकार को सोच समझकर काम करना होगा। प्रदेश के कर्मचारियों को समय समय पर वेतन भुगतान नहीं हो पा रहे है लेकिन योजनाएं कुछ ऐसी बनाई जा रही है जिनका लाभ योजनाओ से संबंधित हितग्राहियों को मिले या न मिले लेकिन बिचौलियों की जेबे जरूर भरे, हां क्यों नहीं वहीं तो कमीशन खोरी का सतत माध्यम है जिससे सफेद पोशाक तक बजन के बराबर उपहार पहुंचाए जाते हैं। कुपोषण प्राय: पर्याप्त संतुलित आहार के आभाव में होता है। कुपोषण के कारण बच्चों और महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे आसानी से कई तरह की बीमारियों के शिकार बन जाते हैं। कुपोषण के अलावा ऐसे कई अन्य बीमारियां हैं जिनका कारण अपर्याप्त या असन्तुलित भोजन करना होता है। कुपोषण से जंग बड़े आसानी से और अच्छे से लड़ी जा सकती है जिसके लिए सरकार के खजाने में मामूली असर ही पड़ेगा। प्रदेश सरकार या महिला बाल विकास कुपोषण से जंग बिना अंडे परोसे लड़ सकती है वो भी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चो को “मुनगा” का भोग कराकर। “मुनगा” में कई पोशाक तत्व पाए जाते है और कई रोगों को दूर करने असर कारक होता है जो कई जगह सहजन के नाम से भी पहचाना जाता है।

क्यों करना चाहिए मुनगा का चयन –औषधीय गुणों से भरपूर मुनगा के पेड़ में आर्युवेद के अनुसार लगभग 300 प्रकार की बीमारियों का उपचार मौजूद है जिसके महत्व को वैज्ञानिकों द्वारा स्वीकारा जा चुका है। मुनगे का छाल, जड़, फली, फूल, पत्ती सहित स्वास्थ्य को स्वस्थ्य रखने उपयोग में लिया जाता है। कुछ डॉक्टरों की माने तो मुनगा में दूध की तुलना पर लगभग चार गुना कैल्शियम और दो गुना प्रोटीन, गाजर से चार गुना विटामिन ए, संतरे से सात गुना ज्यादा विटामिन सी, केले से तीन गुना पोटेशियम और दही से तीन गुना ज्यादा प्रोटीन पाया जाता है।

मुनगा की सब्जी व कढ़ी मध्यान्ह भोजन में हो अनिवार्य -मुनगा पर प्रोटीन, विटामिन पर्याप्त मात्रा में पायी जाती है। इसमें रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा होती है। विद्यालयों आंगनबाड़ी केंद्रों में मध्यान्ह भोजन का मेन्यू के आधार पर वितरण करने सरकार द्वारा प्रारूप बनाया गया है। निर्धारित मेन्यू में उपयोग होने वाली सब्जियों की जगह मुनगा की सब्जी या कढ़ी देने अनिवार्य कर दिया जाए तो शायद कुपोषण मात्र नहीं बल्कि कई रोगों से बच्चो को बचाया जा सकता है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा मुनगा का उपयोग आगनवाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों के मध्यान्ह भोजन में अनिवार्य किए जाने से स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं में कमी के साथ राजस्व में इजाफा किया जा सकता है। ग्राम पंचायत में पड़ी शासकीय जमीनों पर सरकार द्वारा मनरेगा के माध्यम से ग्राम पंचायत के संरक्षण पर मुनगा के पौधों का रोपण से पर्यावरण के साथ साथ स्वास्थ्य के लिए अनुकूल होगा।

(नोट : यह आलेख को एक वर्ष पूर्व  लिखा और प्रकाशन किया गया था किसी कारण बस वेबसाईट में सुधार समय समाप्त हो जाने कारण इसे अब वापस अपडेट किया गया है।)